Jhilmil | झिलमिल

Hindi Kavi Sammelan


An evening filled with laughter and Hindi poetry

झिलमिल

हिंदी भाषा का जो स्वरुप कविताओं में उजागर होता है वह अत्यंत आनंद प्रदान करने वाला होता है। सधे हुए कवि सम्मेलनों में प्रस्तुतिकरण के कौशल द्वारा कविताओं की मिठास में चार चाँद लग जाते हैं। यदि बात हास्य कविताओं की हो रही हो तो फिर मिठास और आनंद का एक नाभकीय विस्फोट होता है। सियैटल नगरी में 'झिलमिल २०१५ - हिंदी कवि सम्मलेन' का आयोजन २० सितम्बर २०१५ को होने जा रहा है। प्रतिध्वनि की ओर से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में आपको सुनने को मिलेंगी अनेक चटपटी बातें और झिलमिलाती हुई कविताएं। पिछले चार वर्षों के समान, इस वर्ष भी सियैटल के स्थानीय कवि अापके मनोरंजन के लिए मंच पर चढ़ेंगे ही, साथ ही ह्यूस्टन, वैंकूवर और पोर्टलैंड से भी कवि अामंत्रित हैं । मंच संचालन की लगाम संभालेंगे हमारे अपने श्री अभिनव शुक्ल।


आमंत्रित कविगण

जनार्दन पाण्डेय "प्रचंड"

वैंकूवर में रहने वाले जनार्दन पाण्डेय "प्रचंड" मंच पर अपनी वीर रस की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं। प्रचंड जी की अग्निधर्मा रचनायें अपनी पूर्ण ओजस्विता के साथ श्रोताओं के मन मस्तिष्क में उतर जाती हैं। वे फिलहाल शहीद मंगल पाण्डेय पर एक खंड काव्य की रचना कर रहे हैं।





डॉ कविता वाचक्नवी

डॉ कविता वाचक्नवी जब अपने गीत सुनाती हैं तो मानो वक्त थम सा जाता है। कविता जी को मंच से काव्य पाठ करते हुए सुनना अपने आप में एक साहित्यिक अनुभव से गुज़रने जैसा है। मानवता के प्रति करुणा और अपनी संस्कृति के प्रति आदर कविताजी की रचनाओं में रचा बसा है। कविताजी की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा उन्हें अनेक साहित्यिक पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। कविता जी फिलहाल ह्यूस्टन में रह रही हैं।







गीतांजली गेरा

गीतांजली की कविताएँ अपने दैनिक जीवन में घटने वाली घटनाओं से लेकर ओरेगन के प्राकृतिक सौंदर्य को अपने में समेटते हुए श्रोताओं को अपने अंतस में झाँकने के लिए प्रेरित करती हैं। मंच पर एक सशक्त प्रस्तुति के साथ भाषा पर अद्भुत पकड़ भी गीतांजलि की रचनाओं को अनूठा बनाती है।











मंच संचालक

अभिनव शुक्ल

सियैटल नगरी वर्षा की रिमझिम फुहारों के संग अभिनव शुक्ल के काव्य की रस धारों से भी भली भांति परिचित है। अभिनव शुक्ल काव्य मंचों पर अपने गुदगुदाते घनाक्षरी छंदों के लिए पहचाने जाते हैं। अपने आस पास घटने वाली घटनाओं से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से कसे उनके व्यंग्य बाण किसी पत्थर का भी दिल आर पार करने की क्षमता रखते हैं।





स्थानीय कविगण

अंकुर गुप्ता

सियैटल के हिंदी श्रोता और दर्शक अंकुर गुप्त के नाम से भली भांति परिचित हैं। प्रतिध्वनि द्वारा आयोजित नाटकों में अंकुर के अभिनय की भूरि भूरि प्रशंसा होती रही है। अंकुर की कविताओं में एक ऐसी सहजता होती है जिससे सब लोग बड़ी सरलता से उनसे जुड़ जाते हैं तथा उनकी प्रस्तुति उन रचनाओं को मंच पर जीवंत कर देती है।



धीरज मेहता

धीरज की कविताओं में उनके कालेज और हास्टल के दिनों की सुगंध से लेकर सामाजिक मुद्दों की गूँज समाई है। उन्होंने प्रतिध्वनि के अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया है। वे कविता और टेनिस के शौकीन हैं। अपने खाली समय में धीरज 'क्राय' संस्था को स्वयंसेवक के रूप में योगदान देते हैं।






राहुल उपाध्याय

राहुल उपाध्याय पिछले अनेक वर्षों से कविता लेखन में सक्रिय हैं. वे अपने निवास पर नियमित काव्य गोष्ठियों का आयोजन भी करते हैं. उनकी कविताओं में सामान्यतः एक ऐसी अंतरदृष्टि देखने को मिलती है जो विषय वस्तु को नए आयाम प्रदान करती है.






मनीष कुमार गुप्त

मनीष मन में चल रही विचारों की आँधी को लिखने का प्रयास करते हैं। गाहे-बेगाहे उन बेतरतीब पंक्तियों में कभी कभी कविता भी निकल आती है, नहीं भी निकलती है तो भी वे उसे कविता कहलवाने की क्रूर कोशिश कायम रखते हैं। वे कहते हैं कि:
न यह आहत मन का रोष है
न भावनाओं का उफान, जुनून-औ-जोश है
न ही पथरीले दिल की दरारों में
मलहमी छंदों का पानी भरता हूँ
मैं तो अकेला हूँ, इसीलिए कविता करता हूँ

दीप्ति व्यास

दीप्ति व्यास को बचपन से शेरो, शायरी और कविता लिखने का शौक है। उन्हें भावनाओं और विचारों को कविता के माध्यम से प्रस्तुत करने में एक अनोखा सुकून मिलता हैं। जावेद अख़्तर जी से काफी प्रेरित हुई और बॉलीवुड में गाने लिखने की भी चाह रखती हैं। झिलमिल में पहली बार भाग लेने के लिए काफी उत्साहित हैं।






आलोक प्रकाश "ख़ुश फ़हम"

गीतों की कड़ीयों में, राग के मिलन में, छंद में, लय में, ताल में, जुमलों में, ग़ज़लों के मतलों में, क़ाफ़िया, रदीफ़ ओर मक़्तों में, नज़्मों में, बोलिवुड़ की रंग रलियों में इनकी दिलचस्पी है। जो जी में आया वो लिखते हैं, ख़ुश फ़हम बन कर लिखते है। इनका कहना है -
कभी ख़ुशी कभी ग़म, ये है सब का वहम
नज़रिया जो बदल सके, वही है ख़ुश-फ़हम



अनु गर्ग

भाषाओँ के प्रेम में अपना सॉफ्टवेयर का व्यवसाय तक त्यागने वाले अनु गर्ग कंप्यूटर विज्ञान की उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका आये थे। शब्दों के मूल से सम्बंधित तीन पुस्तकों के लेखक अपनी कविताओं में भी शब्दों का सुन्दर खेल करते हैं।







फराह सय्यद

फ़राह को हज़ारों शेर कंठस्थ हैं तथा कब, कहाँ, कौन सी पंक्तियाँ मन को गुदगुदाती हैं इसका अच्छा भान है। फराह की कहानियां भी पिछले दिनों अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं तथा खासी चर्चित रही हैं। उनकी रचनाओं में संवेदना के स्तर पर अनेक मर्मस्पर्शी प्रयोग देखने को मिलते हैं। झिलमिल में हमें उनकी कुछ बेहतरीन कविताओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।



पंकज राजवंशी

नगरी के प्रतिष्ठित चिकित्सक पंकज राजवंशी एक बहुत अच्छे कवि तथा फोटोग्राफर हैं। उनकी रचनायें अनेक पत्र पत्रिकाओं में छपी हैं। उनके कार्टून भी बड़े मनमोहक होते हैं। झिलमिल में पंकज की रचनाएँ एक नए चिंतन का रंग भरेंगी।







संतोष खरे

संतोष की कुंडलियों में मधुर हास्य का पुट देखने को मिलता है। वे पिछले अनेक वर्षों से सियैटल क्षेत्र में होने वाली हिंदी गतिविधियों में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप में भागीदारी करते रहे हैं। देखते हैं कि इस वर्ष संतोष हमें क्या सुनाते हैं।





दिव्या रूसिया

दिव्या को बचपन से ही शेरो-शायरी, कविताओं, कहानियों तथा हिंदी भाषा और साहित्य से बहुत लगाव रहा है। वे 10 वर्षों से अपनी रचनाओं में रिश्तों में प्रेम, उनकी गहराई तथा जज्बातों के अनेक रंगों एवं पहलुओं को तराश रही हैं। इनकी रचनायें इन्फोसिस, टीसीएस और अन्य कंपनियों के न्यूज़लेटर एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं और कई प्रतियोगिताओं में जीत चुकी हैं। बतौर साफ्टवेयर इंजीनियर 7 वर्षों के अनुभव के साथ ही इनका कला क्षेत्र में भी काफी रुझान रहा है एवं इसमें भी उन्हें कई उपलब्धियां प्राप्त हैं। 2013 में शादी के लिए अपनी नौकरी से अल्पविराम लेकर, पति हरीश के साथ सिएटल आ गई दिव्या अब पूर्णतः अपनी कला एवं लेखन को समर्पित हैं।

युविका शर्मा

मैं युविका शर्मा, इस निमंत्रण के लिए आप सबका शुक्रिया अदा करना चाहती हूँ। डेलावेर में मास्टर्ज़ के बाद मैंने भारत लौट के ४ साल "बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ़ इंडिया" के साथ बतौर "चीफ ऑफ़ ऑपरेशंस" का अनुभव प्राप्त किया और अब हिल्सबोरो ऑरेगोन में अपने पति जय गुप्ता के साथ रहती हूँ, जो इंटेल में प्रक्रिया इंजीनियर हैं। समाज में अपने समक्ष घटने वाली रोज़मर्रा की बातें, आपसी रिश्तों के तौर तरीके और विंभिन्न दृष्टिकोण मेरी कविता के प्रेरणा स्रोत रहे हैं। और आज आप सब के साथ अपने लेख बांटना चाहती हूँ।







How Much

$15 General admission ($18 at gate)
$12 Pratidhwani members ($15 at gate)
$10 Seniors/Students ($12 at gate)

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When

Date: Sept 20, 2015

Day: Sunday

Time: 4:00 pm

Where

Bellevue Youth Theatre - Crossroads
16051 NE 10th Street
Bellevue, WA 98008
Parking @ Crossroads Community Center
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